Matlabi Shayari in Hindi, in English, photos, Images download

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Matlabi Log Shayari In Hindi

some of person or in hindi log who have very selfish these shayari dedicated to those people

मुझको छोड़ने की वज़ह तो बतादे 

मुझसे नाराज़ थे या मुझ जैसे हजारो थे !!

ढूॅढना ही है तो परवाह करने वालों को ढॅूढ़ीये साहेब…
इस्तेमाल करने वाले तो ख़द ही आपको ढॅूढ़ लेंगे…

ऐ बंदे तू ना दिल लगा
इस दुनिया से
महज फासला चंद रुपयों का
तेरा अपनों से

तुझे उनके मतलबी
होने जा एहसास करा जाएगा 

मतलबी लडकी से अच्छी तो मेरी सिगरेट हे यारो……..
जो मेरे होठ से अपनी जिंदगी शुरू करती हे..
ओर मेरे कदमो के नीचे अपना दम तोड देती हे…!

अपने मतलब के लिये लोग, कितना बदल जाते हैं
वे अपनों को पीछे धकेल कर, आगे निकल जाते हैं
कोई मरता भी हो तो उनकी बला से,
वो तो लाशों पर पाँव रखकर, आगे निकल जाते हैं

कोहनी पर टिके हुए लोग,
टुकङों पर बिके हुए लोग,
करते हैं बरगद की बातें
ये गमले में उगे हुए लोग

दुनिया बहुत मतलबी है,
साथ कोई क्यों देगा,
मुफ्त का यहाँ कफ़न नहीं मिलता,
तो बिना गम के प्यार कौन देगा।

प्यासी ये निगाहें तरसती रहती है
तेरी याद मे अक़्सर बरसती रहती है
हम तेरे खयालों मे डूबे रहते है
और ये ज़ालिम दुनियां हम पर हंसती रहती है

तेरी रुस्वाई से मुझे एक सबक मिला है
दुश्मन भी इतना नहीं करता जितना
तूने दोस्त बनके किया है।

कभी मतलब के लिए
तो कभी बस, दिल्लगी के लिए
हर कोई मुहब्बत ढूंढ रहा है
यहाँ ज़िन्दगी के लिये

मतलबी दुनिया में लोग अफसोस से कहते है की,
कोई किसी का नही…?
लेकीन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए…

मज़बूत होने में मज़ा ही तब है,
जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो..

सिखा दिया दुनिया ने मुझे अपनों पे भी शक करना
मेरी फ़ितरत में तो था गैरों पे भरोसा करना

कैसे करू भरोसा गैरो के प्यार पर,
अपने ही मजा लेते अपनो की हार पर

sab matlabi hai

मसला यह भी है इस ज़ालिम दुनिया का ..
कोई अगर अच्छा भी है तो वो अच्छा क्यॅ है..

आज गुमनाम हूँ तो ज़रा फासला रख मुझसे..
कल फिर मशहूर हो जाऊँ तो कोई रिश्ता निकाल लेना..

देख के दुनिया अब हम भी बदलेंगे मिजाज़
रिश्ता सब से होगा लेकिन वास्ता किसी से नहीं

न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की
अब वजह नहीं मिलती मुस्कुराने की

मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे,
जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे

मुझको क्या हक, मैं किसी को मतलबी कहूँ..
मैं खुद ही ख़ुदा को, मुसीबत में याद करता हूँ !

ढूॅढना ही है तो परवाह करने वालों को ढॅूढ़ीये साहेब…
इस्तेमाल करने वाले तो ख़द ही आपको ढॅूढ़ लेंगे…

इंसान की अच्छाई पर सब खामोश रहते हैं
चर्चा अगर उसकी बुराई पर हो, तो गूॅगे भी बोल पङते हैं

मुझको छोड़ने की वज़ह तो बता दे
मुझसे नाराज़ थे या मुझ जैसे हजारो थे !!

कुछ यूँ हुआ कि.जब भी जरुरत पड़ी मुझे
हर शख्स इतेफाक से.मजबूर हो गया !!

मुखौटे बचपन में देखे थे मेले में टंगे हुए
समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे है चढ़े हुऐ

दुनिया में सबको दरारों में से झांक ने की आदत है,
दरवाजि खुले रख दो, कोई आस पास भी नहीं दिखेगा

सबके दिलों में धङकना ज़रूरी नहीं होता साहब..
कुछ लोगों की अांखों में खटकने का भी एक अलग मज़ा हैं

भुला देंगे तुम्हे भी जरा सब्र तो कीजिए
आपकी तरह मतलबी होने में जरा वक्त लगेगा !!

चिठ्ठी ना कोइ संदेश जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए हो !
इस दिल पे लगा के ठेंस जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए हो !!

कुछ मतलबी लोग ना आते,
तो जिंदगी इतनी बुरी भी ना थी !!

मैं सूरज के साथ रहकर भी भूला नहीं अदब…
लोग जुगनू का साथ पाकर मगरूर हो गये…

तुम्हारे होगें चाहने वाले बहुत इस ‎कायनात‬ में,‬‬
मगर इस ‎पागल‬ की तो कायनात ही तुम हो..‬‬

Apne Haathon Se Yun Chehre Ko Chhupaate Kyun Ho,

Mujh Se Sharmaate Ho Tou Saamne Aatay Kyun Ho…

Tum Kabhi Meri Tarah Kar Bhi Lo Iqraar-E-Wafaa,

Pyar Karte Ho Tou Phir Pyar Chhupaate Kyun Ho…

न परेशानियां, न हालात न ही कोई रोग है,
जिन्होंने हमें सताया है और कोई नहीं वो झूठे लोग हैं।

पल भर लगता है किसी को अपना मानने में
इक उम्र लग जाती है फिर उन्हें जानने में
नकाब अच्छाई का रहता है छिपे हुए चेहरे में
देर लग ही जाती है अक्सर झूठे लोगों को पहचानने में।

दिखा दी है शीशे ने असलियत झूठे लोगों की
बनावटी चेहरे पहन कर अक्सर जो झूठी दुनिया में घूमते हैं।

मैं भी झूठा, तू भी झूठा, झूठी है दुनिया सारी
झूठे हैं ये लोग सभी, झूठे हैं नर-नारी
झूठ ही सबका दाता, सबका झूठ ही पालनहार है
ऐसा कलयुग आया देखो झूठ हुआ सच पर भारी है ।

झूठी दुनिया के झूठे फ़साने हैं
लोग भी झूठे और झूठे ज़माने हैं
धोखे मिलते है हर कदम पर यहाँ
हर तरफ भीड़ है लेकिन अफ़सोस सब बेगाने हैं।

ख्वाबों की दुनिया में अक्सर कोई आहत देता है,
दूर कर ग़मों को अक्सर चेहरे पर मुस्कराहट देता है
मगर अफ़सोस वो दुनिया और वहां के लोग झूठे हैं
वहां बिताया इक इक पल फिर भी अक्सर दिलों को राहत देता है।

सच्चाई बिक रही है इस झूठी दुनिया में
सच बोलने के लिए झूठे लोग बिकते हैं
कौन सुनता है चीखें मजबूर गरीब लाचारों की
जिसके पास ताकत है दौलत की वहीं इंसाफ टिकता है।

झूठे लोगों की दुनिया में सच्चाई की कीमत कौन जानेगा,
टूट कर बिखर जाएगा जो इनसे उलझने कि ठानेगा,
भलाई है दूर रहें ऐसे लोगों से जो अच्छाई का नाटक करते हैं
धकेल देंगे ये बुरे दौर अँधेरे में जो गिरेगा निकल न पाएगा।

मुस्कुराहटें चेहरों पर और दिल में फरेब है,
बातों के धनी हैं खाली इनकी जेब है
अजीब है ये झूठे लोग जो इधर-उधर घूमते हैं
समझते हैं जिसे ये खासियत अपनी वही इनका ऐब है।
(ऐब = दोष)

ये मत समझ कि तेरे काबिल नहीं हैं हम,
तड़प रहे हैं वो अब भी जिसे हासिल नहीं हैं हम.

बातें विश्वास और भरोसे की बेमानी सी लगती हैं,
झूठी दुनिया में वफादारी अनजानी सी लगती है
झूठे लोगों से भरी पड़ी हैं कहानियां यहाँ किताबों में
प्यार से बोल दे कोई तो मेहरबानी सी लगती है।

जरूर एक दिन वो शख्स तड़पेगा हमारे लिए…
अभी तो खुशियाँ बहोत मिल रही है उसे मतलबी लोगो से.

हम मरना भी उस अंदाज़ में पसंद करते है..!
जिस अंदाज में लोग जीने के लिये तरसते है..!

अगर तुम अपने पापा की “परी” हो, तो हम
भी अपने बाप के “नवाब” है !

Matlabi Duniya Ke Log Khade Hain Hatho Me Pathar Lekar,
Main Kahan Tak Bhagu Sheeshe Ka Mukaddar Lekar.

मतलबी दुनिया के लोग खड़े हैं हाथों में पत्थर लेकर, 
मैं कहाँ तक भागूँ शीशे का मुकद्दर लेकर।

Ya To Khareed Lo Ya Kharij Kar Do Dosto,
Yun Kiraye Par Mat Liya Karo Mujhe.

या तो खरीद लो या खारिज़ कर दो दोस्तों, 
यूँ किराए पर मत लिया करो मुझे।

Sirf apne matlab se bulane wale matlabi log shayari

Na Maang Kuchh Zamane Se Ye Dekar Fir Sunate Hain,
Kiya Ehsaan Ek Baar Lakh Baar Jatate Hain.

न माँग कुछ जमाने से ये देकर फिर सुनाते हैं,
किया एहसान जो एक बार वो लाख बार जताते हैं।

Is Swarthi Duniyan Me Jeena Hai To Sote Huye Bhi Pair Hilate Raho,
Warna Log Mara Hua Samajh Kar Jalane Me Der Nahi Lagayenge.

इस स्वार्थी दुनिया में जीना है तो सोते हुए भी पैर हिलाते रहो,
वर्ना लोग मरा हुआ समझ कर जलाने में देर नहीं लगाएंगे।

Pyar Aaj Bhi Tujhse Itna Hi Hai,
Bas Tujhe Ehsaas Nahi Aur Humne Jatana Chhod Diya.

प्यार आज भी तुझसे इतना ही है,
बस तुझे एहसास नही और हमने जताना ही छोड़ दिया।

प्यासी ये निगाहें तरसती रहती है
तेरी याद मे अक़्सर बरसती रहती है
हम तेरे खयालों मे डूबे रहते है
और ये ज़ालिम दुनियां हम पर हंसती रहती है

तेरी रुस्वाई से मुझे एक सबक मिला है
दुश्मन भी इतना नहीं करता जितना
तूने दोस्त बनके किया है।

कभी मतलब के लिए
तो कभी बस, दिल्लगी के लिए
हर कोई मुहब्बत ढूंढ रहा है
यहाँ ज़िन्दगी के लिये

अपने मतलब के लिये लोग, कितना बदल जाते हैं
वे अपनों को पीछे धकेल कर, आगे निकल जाते हैं
कोई मरता भी हो तो उनकी बला से,
वो तो लाशों पर पाँव रखकर, आगे निकल जाते हैं

कोहनी पर टिके हुए लोग,
टुकङों पर बिके हुए लोग,
करते हैं बरगद की बातें
ये गमले में उगे हुए लोग

दुनिया बहुत मतलबी है,
साथ कोई क्यों देगा,
मुफ्त का यहाँ कफ़न नहीं मिलता,
तो बिना गम के प्यार कौन देगा।

मतलबी दुनिया में लोग अफसोस से कहते है की,
कोई किसी का नही…?
लेकीन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए…

मसला यह भी है इस ज़ालिम दुनिया का ..
कोई अगर अच्छा भी है तो वो अच्छा क्यॅ है..

आज गुमनाम हूँ तो ज़रा फासला रख मुझसे..
कल फिर मशहूर हो जाऊँ तो कोई रिश्ता निकाल लेना..

देख के दुनिया अब हम भी बदलेंगे मिजाज़
रिश्ता सब से होगा लेकिन वास्ता किसी से नहीं

मुखौटे बचपन में देखे थे मेले में टंगे हुए
समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे है चढ़े हुऐ

मज़बूत होने में मज़ा ही तब है,
जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो..

सिखा दिया दुनिया ने मुझे अपनों पे भी शक करना
मेरी फ़ितरत में तो था गैरों पे भरोसा करना

कैसे करू भरोसा गैरो के प्यार पर,
अपने ही मजा लेते अपनो की हार पर

न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की
अब वजह नहीं मिलती मुस्कुराने की

मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे,
जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे

मुझको क्या हक, मैं किसी को मतलबी कहूँ..
मैं खुद ही ख़ुदा को, मुसीबत में याद करता हूँ !

ढूॅढना ही है तो परवाह करने वालों को ढॅूढ़ीये साहेब…
इस्तेमाल करने वाले तो ख़द ही आपको ढॅूढ़ लेंगे…

इंसान की अच्छाई पर सब खामोश रहते हैं
चर्चा अगर उसकी बुराई पर हो, तो गूॅगे भी बोल पङते हैं

जरूर एक दिन वो शख्स तड़पेगा हमारे लिए…
अभी तो खुशियाँ बहोत मिल रही है उसे मतलबी लोगो से.

कुछ यूँ हुआ कि.जब भी जरुरत पड़ी मुझे
हर शख्स इतेफाक से.मजबूर हो गया !!

Jindagi bhut achi thi agar kuch matlabi log jindagi me na aate shayari

कुछ मतलबी लोग ना आते,
तो जिंदगी इतनी बुरी भी ना थी !!

मैं सूरज के साथ रहकर भी भूला नहीं अदब…
लोग जुगनू का साथ पाकर मगरूर हो गये…

दुनिया में सबको दरारों में से झांक ने की आदत है,
दरवाजि खुले रख दो, कोई आस पास भी नहीं दिखेगा

सबके दिलों में धङकना ज़रूरी नहीं होता साहब..
कुछ लोगों की अांखों में खटकने का भी एक अलग मज़ा हैं

मुझको छोड़ने की वज़ह तो बतादे
मुझसे नाराज़ थे या मुझ जैसे हजारो थे !!

भुला देंगे तुम्हे भी जरा सब्र तो कीजिए
आपकी तरह मतलबी होने में जरा वक्त लगेगा !!

चिठ्ठी ना कोइ संदेश जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए हो !
इस दिल पे लगा के ठेंस जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए हो !!

अपने मतलब के लिए लोग कितना बदल जाते हैं,अक्सर राह में हाथ छोड़ कर आगे निकल जाते हैं।

अपने मतलब के लिए करते हैं दोस्ती का वादा,
लेकिन पीठ दिखाते ही लोग कत्ल कर जाते हैं।

न कोई पास है न कोई जुदा है,
मतलबी दुनिया का बस मतलब ही ख़ुदा है।

मतलब की दुनिया के आगे सभी रिश्ते फीके पड़ जाते हैं,
रिश्तों की लाश पे पांव रख कर लोग आगे निकल जाते हैं।

अंदाज़ा लगा लो मतलबी दुनिया की हद का,
यहाँ मुफ्त में किसी लाश को कफ़न भी नहीं मिलता।

क्या समझेगी बेमोल मुहब्बत ये मतलबी दुनिया,
यहाँ तो इश्क़ भी टुकड़ों में बिका करता है।

वो दौर चला गया जब रिश्तों के मतलब होते है,
ये दौर नया है जहाँ मतलब के रिश्ते होते हैं।

इश्क़ का दर्द क्या समझे ये जो दुनिया मे लोग बसते हैं,
ये मतलबी जो गिरे हुए हर इंसान के दर्द पे हँसते हैं।

इश्क़ की महफ़िल जवां होने की वाली थी,
कि मतलब की आग ने सब जला कर खाक कर दिया।

हमारे जख्म इसी मतलबी दुनिया ने दिए हैं कि हमने,
अपना बेमोल इश्क़ मतलब के भाव बिकते देखा है।

वो मेरे हैं ये मानने में ये भूल बैठे थे हम,
मतलबी दुनिया में कोई किसी का नहीं होता।

ये तोहफ़ा दिया है इस मतलबी दुनिया ने हमको,
कि गैरों पे भरोसा करने वाले को अपनो में यकीं नहीं आता।

प्यार का होना ज़रूरी नहीं अब इन रिश्तों में जनाब,
इस मतलबी दुनिया में मतलब के रिश्ते ज्यादा चलते हैं।

आज मशहूर हूँ तो रिश्ता बना रही है ये मतलबी दुनिया,
मेरी गुमनामी में सबसे ज़्यादा ठोकर मारी थी इसी ने।

लुत्फ उठा लो जब तक ऊपर रखे है ये मतलबी दुनिया,
जिस दिन नीचे आ गए, कदमों से रौंदने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

कुछ यूं ढाला है मतलबी दुनिया के साँचे ने हमको,
की सबसे वास्ता है पर किसी से राब्ता नहीं।

क्या शिकायत करूँ इस मतलबी दुनिया की ख़ुदा से,
ये दुनिया उसे भी तो मतलब पे ही याद करती है।

इस दुनिया में कौन किसी का क्या हुआ करता है,
मतलबी दुनिया है, मतलब का ही ख़ुदा हुआ करता है।

इस दुनिया ने अपने ख़ंजर से दिए है इतने ज़ख़्म
की अब तो मतलबी दुनिया है और मतलबी हैं हम।

ये जो गरज़ रहे हैं बादल बरसें या नहीं क्या पता,
मतलबी दुनिया है ये, लोग बदल जाते हैं, मौसम का क्या भरोसा।

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